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Hanumanasana Yoga (Monkey Pose)- हनुमानासन योग
हनुमानासन योग करने का तरीका, फायदे और सावधानियां
हनुमानासन योग करने का तरीका, फायदे और सावधानियां...
वास्तव में, योग के प्रति लोग आकर्षित हो रहे हैं जिस तरह से योग के फायदे हैं वैसे ही हर व्यक्ति योग के बारे में गहराई से जानना चाहते हैं। योग में विभिन प्रकार के आसन हैं जिसमें से एक है हनुमानासन (Hanumanasana) है। योगाभ्यास मूल रूप से किसी व्यक्ति की उस स्थिति के बारे में बताते हैं, जो मानव के लिए लाभदायक हो। भगवान हनुमान, भारतवर्ष में सबसे ज्यादा पूजा जाने वाले देवता हैं। महान योगियों ने महावीर हनुमान के ऊपर भी कई आसनों का निर्माण किया है। इन्हीं में से एक आसन का नाम हनुमानासन (Hanumanasana) है। हनुमानासन को (Hanuman Asana), मर्कटासन (Markatasana), मंकी पोज (Monkey Pose) या स्पिलट्स पोज (Splits Pose) भी कहते है। हनुमानासन हठ और विन्यास शैली का चरम या एक्सपर्ट लेवल की कठिनाई वाला योगासन है।
हनुमानासन अभ्यास करने की विधि:-
सर्वप्रथम जमीन पर बैठ जाएं और अपने दोनों पैरों को दो अलग दिशाओं में फैला लें। दोनों पैर के घुटने एक दूसरे से अलग होने चाहिए और दाहिना पैर आगे की ओर रखें एवं बायां पैर पीछे की ओर फैलाएं।
दाएं पंजे को बाएं घुटने के सामने लगभग 30 सेंटीमीटर की दूरी पर रखें।
अब बाएं पैर" को धीरे-धीरे पीछे की ओर तथा दाएं पैर को आगे की ओर फैलाएं।
इस आसन की शुरुआत में पैरों को जितना सम्भव हो उतना फैलाने की कोशिश करें। आरम्भ में शरीर का संतुलन बनाएं रखने के लिए दोनों हथेलियों का प्रयोग कर सकते हैं।
इसमें दोनों पैरों को इतना फैला दें की नितम्ब (हिप) फर्श से सट जाएं।
आसन की इस स्थिति में आने के बाद अपने हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़कर सामने की तरफ रखें।
आंखें बंद कर लें, शरीर को आराम दें और हाथों को जोड़ते हुए पीछे की ओर लेकर जाएं।
अपनी क्षमता के अनुसार इस अवस्था को बनाये रखें, फिर पुरानी अवस्था में धीरे-धीरे वापस आ जाएं।
इसके बाद बाएं पैर को आगे की ओर तथा दाएं पैर को पीछे की और फैलाएं।
हाथों की स्थिति पहले की तरह ही रखते हुए पुन: इस क्रिया को करें। इस तरह इस आसन को दोनों पैरों से बदल-बदलकर करें और दोनों पैरों से इस क्रिया को 2-2 बार करें।
हनुमानासन करने में सावधानी:-
अगर किसी व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में दर्द , गंभीर बीमारी, गर्दन में दर्द होने पर ये आसन न करें।
स्लिप डिस्क, साइटिका, हर्निया और कूल्हों की हड्डियां खिसक जाने की समस्या वाले व्यक्ति इस आसन को बिल्कुल न करें।
कंधे में दर्द की समस्या होने पर हाथ ऊपर न उठाएं।
पैरों को जितना संभव हो उतना ही सीधा करें, अगर पैरों में दर्द महसूस होता है तो उसी जगह पैरों को रोक लें।
घुटने में दर्द या आर्थराइटिस होने पर दीवार के सहारे ही अभ्यास करें।
दिल और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज ये आसन न करें।
कुछ भी समस्या होने पर योग ट्रेनर की मदद जरूर लें।
संतुलन बनने पर आप खुद भी ये आसन कर सकते हैं।
हनुमानासन अभ्यास करने से लाभ:-
इसके लगातार अभ्यास करने से, तो हमारी नाभि के निचले हिस्से की हड्डीयां लचीली होती है।
लोअर बैक, हिप्स और टांगों को स्ट्रेच करता है, और रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है।
लेग मसल्स को स्ट्रेच करके मजबूत और टोन करता है।
इसको करने से साइटिका का दर्द या नर्वस सिस्टम का दर्द हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। इस आसन को करने से हाथ पैरों के स्नायु भी शक्तिशाली बनते हैं।
इसके लगातार अभ्यास दिमाग को शांत करता है और स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंग्जाइटी से राहत देता है।
यह आसन साइटिका (Sciatica) के दर्द को दूर करता है।
यह आसन Plantar Fasciitis/ प्लान्टर फेशियाइटिस (एड़ी के दर्द) में राहत देता है।
यह आसन हैमस्ट्रिंग, ग्लूट्स, और आईटी बैंड को स्ट्रेच करता है।
एथलीट्स को वॉर्मअप में मदद करता है।
मूलाधार और स्वाधिष्ठान चक्र को जाग्रत करता है।
इस आसन के नियमित अभ्यास से स्त्रियों के सभी रोग जैसे कि मासिक धर्म संबंधी व रक्त स्त्राव दूर हो जाते हैं।
इसको करने से हमारी कमर पतली होती है और मांसपेशियां मजबूत होती है।
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