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Yoga Ki Shuruaat\in 5 yogaasan se karen shuruaat
योग की शुरुआत करना चाहते हैं, तो इन ५ योगासन से करें!
योग शुरू करें, इन ५ योगासन से...
अगर पहली बार योगाभ्यास शुरू कर रहे हैं तो, ऐसे कई योगासन हैं जिन्हें सीखना आपके लिए जरूरी और आसान है, ताकि आप बिना किसी परेशानी के इन्हें कर सकें। फिर चाहें आप किसी योग क्लास या घर में योग कर रहे हों या अपनी ऑफिस चेयर पर योग कर रहे हों।
योगासन को संक्षिप्त में बता पाना कई बार संभव नहीं हो पाता है क्योंकि योग विज्ञान में ३00 से भी ज्यादा आसनों के बारे में बताया गया है। लेकिन इन आसन को करने के लिए शरीर को उनके अनुकूल डालना पड़ता है। किसी योगी की योगयात्रा शुरू करने के लिए इन आसनों की शुरुआत का ही बड़ा महत्व बताया गया है। इसीलिए आपको शुरुआत में योग के 5 आसनों के बारे में जानकारी देंगे। इन आसनों को अगर आप रोज 5-10 सांस लेने और छोड़ने तक भी करते रहेंगे तो, ये बाकी योगासनों के अभ्यास के लिए आपके शरीर और मन को तैयार करने में मदद करेंगे।
वृक्षासन, एक पेड़ की तरह खड़े होकर और संतुलन बनाकर किया जाने वाला बेहद शानदार आसन है। ये आसन योगी को ध्यान बढ़ाने और संतुलन हासिल करने में मदद करता है। इस आसन के अभ्यास के दौरान आप सांसों को संतुलित करना सीखते हैं और एक पैर पर शरीर का संतुलन साधना भी सीखते हैं। यह आसन आपको अंदर से मजबूत बनाने में मदद करता है।
इस आसन को करने की विधि:
सबसे पहले सावधान मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएं।
अपने दोनों हाथ को जांघों के पास ले आएं।
फिर धीरे-धीरे दाएं घुटने को मोड़ते हुए उसे बायीं जांघ पर रखें।
अपने बाएं पैर को इस दौरान मजबूती से जमीन पर जमाए रखें, और पैर को एकदम सीधा रखें और सांसों की गति को सामान्य करें।
धीरे से सांस खींचते हुए दोनों हाथों को ऊपर की तरफ ले जाकर 'नमस्कार' की मुद्रा बनाएं।
अपने सामने उचित दूर रखी किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करें और संतुलन बनाए रखें।
अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। शरीर मजबूत के साथ ही लचीला भी रहेगा।
गहरी सांसें भीतर की ओर खींचते रहें।
सांसें छोड़ते हुए शरीर को ढीला छोड़ दें।
धीरे-धीरे अपने हाथों को नीचे की तरफ ले आएं।
अब अपनी दायीं टांग को भी जमीन पर ले आएं।
वैसे ही सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं जैसे आप आसन से पहले खड़े थे।
इसी प्रक्रिया को अब अपने बाएं पैर के साथ दोहराएं।
पश्चिमोत्तानासन (Paschimottanasana)
पश्चिमोत्तानासन बेहद महत्वपूर्ण आसन में से एक है। इस आसन को योगमट पर बैठकर और सामने की तरफ झुककर किया जाता है। इसके अभ्यास से हैमस्ट्रिंग (हैमस्ट्रिंग मांसपेशी हिप से लेकर घुटने तक जांघों के पीछे मौजूद मांसपेशी है), पीठ के निचले और ऊपरी हिस्से के साथ ही मांसपेशी को भी अच्छा स्ट्रेच मिलता है। पश्चिमोत्तानासन प्रत्येक योगी के लिए बेहतरीन आसन है जिसने अभी योग का अभ्यास शुरू किया है।
पश्चिमोत्तानासन को करने की विधि::
सबसे पहले जमीन पर दोनों पैरों को एकदम सीधे फैलाकर बैठ जाएं।
अब दोनों पैरों के बीच में दूरी न हो और जितना भी संभव हो पैरों को सीधा रखें।
इसके साथ ही अपनी गर्दन, सिर और रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें।
अपनी दोनों हथेलियों को दोनों घुटनों पर रखें।
अब अपने सिर और धड़ (शरीर के बीच का हिस्सा होता है, जो गर्दन और भुजा व टांगों के बीच में स्थित है) को धीरे से आगे की ओर झुकाएं।
घुटनों को बिना मोड़े हाथों से पैरों की उंगलियों को छूने का प्रयास करें।
इस स्थिति में गहरी श्वास लें और धीरे से श्वास को छोड़ें।
अपने सिर और माथे को दोनों घुटनों से छूने का प्रयास करें।
बांहों को झुकाएं और कोहनी से जमीन को छूने का प्रयास करें।
श्वास को पूरी तरह छोड़ दें और इसी मुद्रा में कुछ देर तक बने रहने की कोसिस करें।
वापस पहली वाली मुद्रा में आ जाएं, सामान्य रूप से श्वास लें और इस आसन को 3 से 4 बार दोहराएं।
अधोमुख श्वानासन (Adho Mukha Svanasana)
अधोमुख श्वानासन बहुत ही महत्वपूर्ण आसन है। अधो मुख स्वानासन कुत्ते की तरह आगे की ओर झुकने का प्रतीक है, इसलिए इसे अधो मुख स्वान आसन कहते हैं। यह बछड़ों और हैमस्ट्रिंग को फैलाने में मदद करता है और पैरों और बाहों को भी मजबूत करता है। यह बाहरी तिरछी पेट की मांसपेशियों में ताकत बढ़ाने में भी मदद करता है। अधोमुख श्वानासन पूरे शरीर को अच्छा खिंचाव और मजबूती देता है। अधोमुख श्वानासन का अभ्यास करने से बीमारियां आपसे दूर रहती हैं। इस आसन के अभ्यास से आप स्ट्रेस, एंग्जाइटी, डिप्रेशन और अनिद्रा/इंसोम्निया जैसी समस्याओं से भी दूर रहते हैं।
इस आसन को करने की विधि::
सबसे पहले योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
फिर अपनी सांस को खींचते हुए पैरों-हाथों के बल शरीर को उठाएं और टेबल जैसी आकृति बनाएं।
श्वास को बाहर निकालते हुए धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर की तरफ उठाएं।
ऊपर की तरफ होते समय कुहनियों और घुटनों को सख्त बनाए रखें।
तय करें कि आप का शरीर उल्टे 'V' के आकार में आ जाए।
इसके अभ्यास के दौरान आप के कंधे और हाथ एक सीध में रहें।
और पैर हिप्स की एक सीध में रहेंगे। ध्यान रहे कि आपके टखने बाहर की तरफ रहेंगे।
अब अपने हाथों को नीचे जमीन की तरफ दबाएं।
अपनी गर्दन को लंबा करने की कोशिश करें।
आपके कान आपके हाथों के भीतरी हिस्से को छूते रहें।
अपनी निगाह को नाभि पर केन्द्रित करने की कोशिश करें।
इस मुद्रा में कुछ सेकेंड्स तक रुकें और उसके बाद घुटने जमीन पर टिका दें।
सेतु बंधासन, असल में अधोमुख श्वानासन का विपरीत आसन है। इस आसन में शरीर की आकृति एक सेतु की अवस्था में रहती है, जिसमें शरीर को “U” की आकृति में मोड़ना पड़ता है। अधोमुख श्वानासन में जहां शरीर को आगे की तरफ से झुकाया जाता है। वहीं सेतु बंधासन में शरीर को पीछे की तरफ से झुकाया जाता है। यह आसन पीठ के निचले हिस्से में दर्द और टखने, कूल्हे, पीठ, जांघों और कंधे की अकड़ को दूर करने में के लिए प्रभावी है। इस आसन को शुरूआती लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जिन्होंने हाल ही में योग का अभ्यास शुरू किया है।
इस आसन को करने की विधि::
सबसे पहले योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं, फिर सांसो की गति सामान्य रखें।
इसके बाद हाथों को बगल में रख लें, फिर धीरे-धीरे अपने पैरों को घुटनों से मोड़कर हिप्स के पास ले आएं।
अपने हिप्स को जितना हो सके फर्श से ऊपर की तरफ उठाएं। हाथ जमीन पर ही रहेंगे।
इस आसन कुछ देर के लिए श्वास को रोक कर रखें।
इसके बाद श्वास छोड़ते हुए वापस जमीन पर आएं।
अपने पैरों को सीधा करें और विश्राम करें।
कम से कम 10 सेकेंड तक आराम करने के बाद फिर से शुरू करें।
बालासन संस्कृत का शब्द है बाल का अर्थ है - शिशु या बच्चा और आसन का अर्थ मुद्रा है। बालासन में हम एक शिशु की तरह वज्र आसन में बैठ कर हाथों और शरीर को आगे की ओर झुकाते है। यह आसन बेहद आसान है, और अनेक फायदे है, यह आसन कई विभिन्न आसनों से मिलता-जुलता रूप है। योग करने के बाद एक योगी को विश्राम पाने और शरीर की थकान को दूर करने के लिए बालासन का अभ्यास करते हैं। बालासन न सिर्फ शुरूआती लोगों के लिए ही नहीं बल्कि हर स्तर के योगियों का सर्वश्रेष्ठ आसन है।
बालासन करने की विधि ::
सबसे पहले योगमैट पर घुटनों के बल बैठ जाएं।
अपने दोनों टखनों और एड़ियों को आपस में छुआएं।
फिर धीरे-धीरे अपने घुटनों को बाहर की तरफ जितना हो सके फैलाएं।
गहरी श्वास खींचकर आगे की तरफ झुकें और पेट को दोनों जांघों के बीच ले जाएं और सांस छोड़ दें।
हाथो को सीधा रखे, और माथे को जमीन पर लगाये।
हाथों को शरीर के दोनों ओर से आगे की ओर बढ़ाते हुए जमीन पर रखें, अब पूरे शरीर को रिलैक्स करने दे और फिर एक गहरी सांस लें और उसे छोड़े।
अब हथेली आकाश की ओर (यदि ये आरामदायक ना हो तो आप एक हथेली के ऊपर दूसरी हथेली को रखकर माथे को आराम से रखें)।
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